जयनगर (मधुबनी)। भारत और नेपाल के बीच दशकों से चली आ रही बेटी-रोटी के संबंधों की डोर अब सियासी फरमानों से कमजोर पड़ती दिख रही है। नेपाल सरकार द्वारा भारतीय किसानों की सब्जी को नेपाली बाजारों में बेचने पर रोक लगाए जाने के बाद शनिवार को सीमावर्ती किसानों का आक्रोश फूट पड़ा। गुस्साए किसानों ने जयनगर थाना क्षेत्र के बेतौंहा गांव स्थित भारत-नेपाल के माड़र बॉर्डर कस्टम चेक पोस्ट पर मुख्य सड़क को घंटों जाम कर दिया।
सुबह करीब 10 बजे से शुरू हुआ यह जाम दोपहर 2 बजे तक जारी रहा। इस दौरान प्रदर्शनकारी किसानों ने बेतौंहा-माड़र के साथ-साथ हथलेटवा बॉर्डर को भी पूरी तरह बंद कर दिया। नतीजतन दोनों देशों के बीच पैदल और वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई। सैकड़ों लोग बॉर्डर के दोनों ओर फंसे रहे। स्कूली बच्चे, मरीज और रोजमर्रा के काम से आने-जाने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शनिवार सुबह बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों, ठेलों और साइकिलों पर ताजी सब्जियां लादकर माड़र बॉर्डर पहुंचे थे। रोज की तरह वे नेपाल के सिरहा, लहान और जनकपुर के बाजारों में सब्जी बेचने जाने वाले थे। लेकिन नेपाली कस्टम अधिकारियों ने नए नियम का हवाला देकर उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया।
किसानों का कहना है कि नेपाल सरकार ने हाल ही में भारतीय कृषि उपज, विशेषकर सब्जी पर कस्टम शुल्क बढ़ा दिया है और बिना परमिट बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। इससे पहले सीमावर्ती किसान 50 से 100 रुपये के मामूली शुल्क पर अपनी उपज नेपाल में बेच आते थे। अब न केवल शुल्क कई गुना बढ़ गया है, बल्कि कागजी प्रक्रिया इतनी जटिल कर दी गई है कि छोटे किसान उसे पूरा ही नहीं कर पा रहे।
इसी बात से नाराज किसानों ने पहले बॉर्डर पर नारेबाजी की और फिर सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। देखते ही देखते बेतौंहा से माड़र तक वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
धरने पर बैठे किसान रामप्रीत यादव ने कहा, “हमारी तीन पीढ़ियां नेपाल में सब्जी बेचकर पली हैं। हमारे खेत यहां हैं, बाजार वहां है। अब अचानक रोक लगा दी गई तो हम कहां जाएं? सब्जी खेत में सड़ रही है, कर्ज सिर पर है।”
एक अन्य किसान सुरेश मंडल ने बताया कि जयनगर, लदनियां, खजौली और बासोपट्टी प्रखंड के हजारों किसान पूरी तरह नेपाली बाजार पर निर्भर हैं। भारतीय मंडियों में भाव नहीं मिलता, जबकि नेपाल में उनकी फूलगोभी, बैंगन, टमाटर, भिंडी और परवल की अच्छी मांग रहती है। रोक के बाद उनकी लागत भी नहीं निकल पा रही।
किसान नेता महेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि यह सिर्फ व्यापार का सवाल नहीं, बल्कि सांस्कृतिक रिश्ते का सवाल है। “भारत-नेपाल का रिश्ता बेटी-रोटी का कहा जाता है। सीमा के दोनों ओर शादियां होती हैं, रिश्तेदारियां हैं। ऐसे में सब्जी जैसी रोजमर्रा की चीज पर रोक लगाना इस रिश्ते पर चोट है।”
जाम के कारण भारत से नेपाल जाने वाले और नेपाल से भारत आने वाले सैकड़ों यात्री फंस गए। कई स्कूली बच्चे जो रोजाना सीमा पार स्कूल जाते हैं, वे भी धूप में फंसे रहे। एक एंबुलेंस में मरीज को लेकर जा रहे परिजनों ने किसानों से हाथ जोड़कर रास्ता देने की गुहार लगाई, जिसके बाद मानवता के नाते एंबुलेंस को जाने दिया गया।
नेपाल की ओर से आए व्यापारी रामबाबू साह ने बताया कि वे जयनगर से कपड़ा खरीदने आए थे, लेकिन जाम में फंस गए। “हमारा व्यापार एक-दूसरे पर टिका है। नेपाल में भारतीय सब्जी न आए तो वहां महंगाई बढ़ेगी और यहां किसान बर्बाद होंगे। दोनों सरकारों को सोचना चाहिए।”
सूचना मिलते ही जयनगर के एसडीओ, डीएसपी और थानाध्यक्ष दलबल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने किसानों को समझाने का प्रयास किया और उनकी मांगों को वरीय अधिकारियों व एसएसबी के माध्यम से नेपाल प्रशासन तक पहुंचाने का आश्वासन दिया।
लगभग चार घंटे की मशक्कत के बाद दोपहर 2 बजे किसानों ने जाम समाप्त किया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर नेपाल सरकार अपना फैसला वापस नहीं लेती या भारत सरकार हस्तक्षेप नहीं करती, तो वे अनिश्चितकालीन बॉर्डर बंदी करेंगे।
सीमा व्यापार के जानकारों का मानना है कि नेपाल का यह कदम अपने किसानों को संरक्षण देने के नाम पर उठाया गया है, लेकिन इससे सीमावर्ती अर्थव्यवस्था को गहरा झटका लगेगा। मधुबनी, सीतामढ़ी, अररिया और किशनगंज के हजारों परिवारों की आजीविका प्रत्यक्ष रूप से नेपाल के हाट-बाजारों से जुड़ी है।
फिलहाल बॉर्डर पर आवाजाही बहाल हो गई है, लेकिन किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ दिख रही हैं। सबकी निगाहें अब दोनों देशों की सरकारों पर टिकी हैं कि क्या दशकों पुराने बेटी-रोटी के रिश्ते को बचाने के लिए कोई बीच का रास्ता निकलेगा या सियासी फरमान इसी तरह भारी पड़ता रहेगा।

